इंद्रधनुष कैसे बनता है?
हिन्दी · व्हाइटबोर्ड · 1:08
हिंदी में एक छोटा व्हाइटबोर्ड वीडियो: धूप और बारिश की बूंदें मिलकर इंद्रधनुष कैसे बनाती हैं, उसमें सात रंग हमेशा एक ही क्रम में क्यों दिखते हैं, और उसे देखने के लिए कहां खड़े हों।
चैप्टर
ट्रांसक्रिप्ट
बारिश के बाद आसमान में रंगों का पुल कैसे बन जाता है? इसके लिए दो चीजें चाहिए: सूरज की रोशनी और हवा में तैरती वर्षा की बूंदें। बादल बरसते हैं और सूरज चमकता है, तभी आसमान में यह जादू संभव होता है। रोशनी बूंद में घुसते ही मुड़ती है। इसे अपवर्तन और परिक्षेपण कहते हैं। बूंद के अंदर पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है, और रोशनी वापस मुड़कर बाहर निकलती है। इस तरह सफेद रोशनी टूटकर सात रंगों में बिखर जाती है। लाल रंग सबसे ऊपर रहता है, और बैंगनी सबसे नीचे, हर रंग की अपनी जगह है। इंद्रधनुष सूर्य के विपरीत दिशा में दिखता है, लगभग 42 डिग्री कोण पर। अगली बार बारिश के बाद सूरज पीठ पीछे रखकर देखिए, आसमान में जादू मिलेगा!